Itihaslekhan ki Vibhinn Drishtiyan (Hindi)
प्राचीन काल में अतीत को देखने का नजरिया कुछ और था। समय बीतने के साथ मनुष्य की चेतना के विकसित होने पर इसमें परिवर्तन आता गया और अतीत के विद्वानों ने अलग-अलग नजरिए से उनको देखा, परखा और इसका विवेचन किया। जैसे-जैसे समय बीतता गया इतिहास लेखन की धारा में सुधार परिष्कार होता गया । प्रस्तुत पुस्तक प्राचीन काल से लेकर इस समय तक की विभिन्न दृष्टियों का आंकलन करती है जिसमें जातिगत स्वार्थों, राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक मेलजोल की झलक मिलती है। प्रस्तुत पुस्तक इन सबको समेट कर इन दृष्टिकोणों को एक जगह रखने का प्रयास है ताकि विवेकशील छात्र इतिहास की विभन्न धाराओं में इसकी सही स्थिति की पहचान कर सकें और विश्व में चले आ रहे विभिन्न टकरावों को समझ सकें। प्रभात कुमार शुक्ल : भूतपूर्व सदस्य सचिव, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, फेलो, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी, नई दिल्ली। प्रकाशन : इंडिगो एंड द राज : पेजेंट प्रोटेस्ट इन बिहार (1781-1917)। उपनिवेशवाद और छोटानागपुर के आदिवासी किसान, भारतीय राष्ट्रवाद और आदिवासी किसानों का विद्रोह, सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद, 1857 का विद्रोह आदि विषयों पर इनकी रचनाएं संपादित पुस्तकें, प्रोसीडिंग्स ऑफ दि इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस और शोध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित; इंडिया, सेंट्रल एशिया और रशिया : थ्री मिलिनीया ऑफ कंटैक्ट ( सह-संपादित ), कोलोनियलिज्म एंड आदिवासीज स्ट्रगल फार लैंड राइट्स इन छोटानागपुर (झारखंड) 1800 – 1952 रामकिशन गुप्ता (अनुवादक) यूको बैंक, पार्लियामेंट स्ट्रीट, नई दिल्ली में प्रबंधक (हिंदी) के पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने रोज़ा लक्ज़मबर्ग की पुस्तक रिफार्म और रिवोल्यूशन का हिंदी अनुवाद किया है। आप फिदेल कास्त्रो के चुने हुए व्याख्यानों का अनुवाद कर चुके हैं। इसके अलावा उन लेखों की सूची काफी लंबी है जिनका अनुवाद उन्होंने किया है।
Specifications
- Author
- Prabhat Shukla
- Format
- Paper Back
- Language
- Hindi
AI Readiness
Good foundation, but some important product data is still missing.