Heritage Of Dalit - Hindi
दलितों का उत्तराधिकार भारत के आध्यात्मिक और सामाजिक इतिहास का एक सशक्त विश्लेषण है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि जातिगत भेदभाव और छुआछूत न तो शास्त्रों का हिस्सा थे और न ही भारतीय सभ्यता की मूल दृष्टि का। वेदों, उपनिषदों से लेकर वाल्मीकि, कबीर और डॉ. अंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों के संदभों के माध्यम से यह पुस्तक उस समृद्ध विरासत को पुनर्स्थापित करती है, जो पूरे भारत की साझा धरोहर है। "प्राचीन भारत के ९०% ऋषि 'दलित' समाज से थे। मैं जातिवाद की कडी निंदा करता हूँ। आत्मा की कोई जाति नहीं होती। जैसे हम डॉक्टर या वकील की जाति नहीं पूछते, वैसे ही समाज में भी योग्यता का सम्मान होना चाहिए।" — गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर
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