कुछ किसी की … और कुछ मेरी डायरी के पन्नों से
डायरी शब्द का नाम सुनते ही दिमाग़ में साधारणतय: एक ही तस्वीर उभरती है, जैसे कोई अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को तारीख़वार एक पन्ने पर दर्ज़ कर रहा हो| लेकिन, कभी-कभी जिंदगी का कोई हिस्सा, व्यक्ति के लिए इतना ख़ास हो जाता है कि वह इनको शब्दों में ढाल देना चाहता है और तब शब्द कभी कहानी का रूप धारण कर लेते हैं, तो कभी संस्मरण का| इन्हें भी हम डायरी का पन्ना ही कहेंगे| यह अलग बात है कि ये पन्ने किसी तारीख या समय में बँधे नहीं होते| डायरी के ये पन्ने, समाज के लिए कभी एक संदेश हो सकते हैं और कभी आँखें खोलने वाली घटना भी, व्यक्तिगत तौर पर ये पन्ने किसी के पश्चताप के प्रतीक भी हो सकते हैं तो किसी के लिए सुखद यादगार पल भी| लेखक के द्वारा लिखे गए डायरी के ये पन्ने, बस कुछ ऐसी ही एक कोशिश भर है…
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